शनिवार, 22 दिसंबर 2012

513-मेरा परिचय



513-मेरा परिचय

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, October 13, 2012 at 4:12pm ·
पता नही मैं  आदमी हूँ या एक् शब्द ..
या अभी -अभी ..पौधे मे ..खिला  हुआ कोई फूल .
या फिर  ओंस बूंद मे दृष्टिगोचर होता हुआ  मेरा चेहरा

हर तरफ मेरी ही परछाई है ..मै चाहता नही .फिर  भी .सर्वत्र दिखाई देता हूँ  .
.नदी की देह सा ..मै ..समूचे आकाश को ओड़ कर बहता हूँ ..

 इसलिए मै कहता हूँ  ..मुझे धरती कह लो ...
या पहाड़ से उतरती हुई ..एक् पगडंडी ही मान लो ..
या फिर  मन्दिर मे जलते हुए ..दीपक का दर्द समझ लो ..

मै   सीडियों की तरह उतर रहा  हूँ ..
सबके इंतजार मे ..प्यार सबमे ..सबके लिए  है -
प्रेम  एकाकी हो नही सकता
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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