शनिवार, 22 दिसंबर 2012

512-जब में कविता पढ़ता हूँ ...



512-जब में कविता पढ़ता हूँ ...

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, October 13, 2012 at 3:58pm ·
जब में कविता पढ़ता हूँ  ...

जब मै कविता  पढ़ता हूँ ,..

पत्ते पर बैठ  कर चीटियों सा ...
नदी पार करने लगता हूँ .

जब मै कविता सुनता हूँ ,..

सीधे जड़ों में पहुँच  जाता हूँ 

फिर  पानी की तरह शिराओ में पहुँच कर
पत्तो की तरह हरा हो जाता हूँ 

जब मै कविता  के लिए शब्द चुनता हूँ 

तब दुःख ,..आकाश से बादलों की तरह बरसने लगता है
और
मन की घाटियों में
इन्द्र -धनुष की तरह उल्लास उभरने लगता है ..

जब मै कविता  लिखता हूँ 
.कनपटियों में गर्म लोहा पिघल कर ,..लेने लगता है विभिन्न आकार ..

.तब घास के दर्दो से चुभ जाते है मेरे पांव ..

जब मै कविता समाप्त करता हूँ 

कृष्ण -वंशी की सुनाई देती है

दूर से आती हुई मधूर  तान ......

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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