शनिवार, 22 दिसंबर 2012

501-तुममे और मुझमे भला क्या हैं फर्क



501-तुममे और मुझमे भला क्या हैं फर्क

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Sunday, October 7, 2012 at 1:40pm ·
तुममे और मुझमे भला क्या हैं फर्क

तुममे और मुझमे ....?
भला क्या हैं फर्क

तुम प्रेम भाव हो
मै हूँ उसका ...शाब्दिक अर्थ

प्यासी नदी कों
प्यार के सागर तक तो जाना ही हैं
तुम्हारे और मेरे अनाम रिश्ते के बीच
इसलिए नहीं हैं कोई शर्त

अपने मन की आँखों से निहार लो
मै न देह हूँ ,न मन हूँ
न बुद्धी हूँ ,न अहंकार हूँ
आवरण विहीन सा हूँ मै बेपर्त

चाहों तो मुझे निर्मल जल सा
अपनी अंजुरी में भर लों
चाहों तो मुझे तुम धूप के आँचल सा
अपने तन पर ओढ़ लो
चाहो तो सुगन्धित हवा की तरह
मुझसे ..अपनी साँसों कों महका लों
पुरुष और प्रकृति के बीच
जो प्रेम हैं
उसमे विरह का मीठा मीठा सा हैं
एक ...न समझ आने वाला दर्द

मेरा ह्रदय आईना हैं
और उसमे उभर आया हैं
तुम्हारी छवि का अदभुत सौन्दर्य

तुममे और मुझमे .....?
भला क्या हैं फर्क
किशोर कुमार खोरेंद्र

कोई टिप्पणी नहीं: