शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

466-मैं ही हूँ अपना अजीज



466-मैं ही हूँ अपना अजीज

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Wednesday, July 25, 2012 at 7:07pm ·
खुद से ही बाते कर लेता हूँ
मैं ही हूँ अपना ...अजीज
कितनी ही हो परिस्थितियाँ विपरीत
पर छोड़ता नहीं हूँ मैं ..उम्मीद
सच्चाई की राह पर तन्हा  ही चलता हूँ
सभी चेहरे लगते हो भले  अपरिचित
मंझधार में संग मेरे
न पतवार हैं ,न नाव हैं ,न ही नाविक
प्रलोभन देती सी 
लहरें करती हैं मुझे भ्रमित
मै ही कभी हो जाता हूँ
आकाश सा व्यापक
और कभी
धरती सा .....सिमित
पंक में मै ही खिल उठा हूँ
पंकंज सा
मन का सौन्दर्य लिये नैसर्गिक
किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

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