शुक्रवार, 21 दिसंबर 2012

465-तुम और पाक हो जाओगी




465-तुम और पाक हो जाओगी

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Tuesday, July 24, 2012 at 7:25pm ·
मेरा ह्रदय
मौन का घर हैं
ख़ामोशी की ईटों से
बनी हैं इसकी दीवार
मेरी तन्हाई रहती हैं यहाँ
जिसका तुम्हारे सिवाय
किसी और से
नहीं हैं सरोकार
तुम और पाक हो जाओगी
इसमे
रहने के दौरान
तुम्हारी याद में
मेरे तसव्वुर ने किया हैं
इस मकान का निर्माण
तुम्हारा दिल
मेरे दिल में मिल जायेगा
कहाँ  रख पाओगी उसे
खुद तक ही बरकरार
यहाँ की खिड़कियाँ ,परदे ..
सभी हैं पारदर्शी
देख सकती हो तुम
मुझे ...आर पार
तुम्हारी रूह का ..
मेरी रूह कों हैं
बस इंतज़ार
तुम्हारे प्यार की उँगलियों का
पाते ही स्पर्श
मिल जाएगा मुझे निर्वाण
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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