गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

456-मै होता हूँ चुप



456-मै होता हूँ चुप

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, July 21, 2012 at 1:47am ·

जब भी ......

मै होता हूँ चुप

तुम्हें पाता हूँ

अपने ...सम्मुख

बिना अक्षरों के

बिना शब्दों के

बिना स्वरों के

करता हूँ तुम्हें

तब मै ..महसूस

तुम्हारे प्रेम की

शातिर आँखों में

होता हैं

मेरा ही ..प्रतिरूप

कभी छाँव सी

घेर लेती हो

कभी आकर

छू लेती हो

बनकर ....धूप

अचानक

पत्तियों की नोंक सा

मुझे जाती हो चुभ

तुम्हारे

सशरीर होने का

पर होता नहीं

मेरे ख्यालों में

दूर दूर तक

कोई ......सबूत

मेरी कल्पना के

सागर मैं

नमक सी

रहती हो तुम घुल

बिना आकृति के

जब से ....

मै तुम्हें चाहने लगा हूँ

तो लोग कहते हैं

मै हो चुका हूँ

संसार से ....विमुख

जब भी ......

मै होता हूँ चुप

तुम्हें पाता हूँ

अपने ...सम्मुख
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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