गुरुवार, 20 दिसंबर 2012

441-आज भी मै अकेला हूँ



  
441-आज भी मै अकेला हूँ
by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Friday, July 6, 2012 at 12:23am ·
आज भी मै अकेला हूँ
मेरे साथ सिर्फ कविताओं की खामोश नदी हैं
और तुम्हारी तारीफों के पुल हैं
यादों के सूने वन में
स्मृति के सागौन के ऊँचे ऊँचे वृक्ष उगे हैं
कभी कभी लगता हैं
पहाड़ों के शिखरों  की ओट से
किरणों की तरह  तुम मुझे देखती हो
अतीत की पगडंडियाँ कहती हैं
मेरे साथ चलों
क्या पता पुरवाई   सी तुम चलकर
एकाएक ...
मुझे खोजती हुई यहाँ आ जाओं
इसलिए मैं यही रुका हुआ हूँ
पतझड़ के पत्तों के बीच
सावन की बूंदों से भींगता हुआ
और और हरी होती हुई घासों के संग
हरा होता हुआ
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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