बुधवार, 19 दिसंबर 2012

432-यह तो हैं तय



432-यह तो हैं तय

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Thursday, June 28, 2012 at 2:55pm ·
हां देखते समय

तुम्हारी तस्वीर

हो जाया करता हूँ मै तन्मय


तुम यदि इज़ाज़त दो तो

छू लिया करूंगा

तुम्हारे कपोल

ओंठ ,और नयन द्वय


तब  मत करना  फिर

यह जानकर तुम विस्मय


भूल जाया करता हूँ

खुद कों ,खुदा कों

इस दुनियाँ कों

तुम्हारी यादों की खुश्बू में

मेरे अस्तित्व का धुँए सा

जब हो जाता हैं विलय


तुम भी तो मेरे ख्यालों में खो जाती होगी

सोचकर मुझे प्रसन्नता होती हैं

झंकृत हो उठता हैं तब मेरा कोमल हृदय


तुम्हारे मौन के  मौन के अंतिम सतह से

सुनाई देते हैं मुझे

मधुर ..सुर ताल और लय ......


स्वप्न में तुमसे मेरा हो चुका हैं



प्रिये अन्तरंग परिचय 



इस जन्म में नहीं तो

अगले जन्म में

तुमसे होगा मेरा मिलन

यह तो हैं तय

किशोर कुमार खोरेन्द्र 

2 टिप्‍पणियां:

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

Kedar Nath इस जन्म में नहीं तो

अगले जन्म में

तुमसे होगा मेरा मिलन

यह तो हैं तय...bahut sunder..naman Dada

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

Sakhi Singh bahut sunder..kitne ahsaas bhar dete hai aap kalam se