बुधवार, 19 दिसंबर 2012

425-तुम बोलती नहीं हो



425-तुम बोलती नहीं हो

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, June 25, 2012 at 7:53pm ·
तुम बोलती नहीं हो
फिर भी सुन लेता हूँ तुम्हारी मधुर आवाज
तुम लिखती नहीं हो
तब भी जान लेता हूँ तुम्हारे दिल की बात
बस तुम्हारी तस्वीर देखी हैं
पर लगता हैं
तुम रहती हो हरदम जैसे मेरे आसपास
जिस गीत कों मै लिखना चाहता हूँ
उसे ही तुम पहेले से
गुनगुनाने लग जाती हो
जिस रंग कों चुनता हूँ
वही होती हैं तुम्हारी पोशाक
बिना बोले ,बिना शब्दों के
हम दोनों कर लिया करते हैं
शायद संवाद
तुमने मुझसे कभी कहा नहीं
पर मै जानता हूँ
मन ही मन तुम मुझसे
करती हो प्यार
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

2 टिप्‍पणियां:

ravi mishra ने कहा…

tum bolti nahi ho fir bhi sun leta hu teri aawaz.....................umda bhai hi umda

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

shukriya ravi ji