बुधवार, 19 दिसंबर 2012

424-मुझे अच्छा लगता हैं



424-मुझे अच्छा लगता हैं

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, June 25, 2012 at 12:28am ·
मुझे अच्छा लगता हैं

अपने मन के भीतर छिपे

निश्छल प्रेम कों करना निसंकोच

तुम्हारे सम्मुख अभिव्यक्त


 कई बार मेरे इस व्यवहार से

हो जाती  होगी तुम आश्चर्यचकित


अपने हृदय के भाव कों करने के लिये प्रदर्शित

और किसी मित्र की मुझे जरुरत भी नहीं

तुम्हारे अतिरिक्त


जैसा हूँ तुम्हारे समक्ष हूँ

मै प्रस्तुत


मुझे तुम समुद्र की तरह असीम लगती हो

आकाश की तरह व्यापक लगती हो

इन्द्रधनुष के  सात  रंगों से बनी

एक खुबसूरत दृश्य सी लगती हो

तुम्हारी निगाहों के घेरे से घिरा रहना चाहता हूँ

जिसकी सीमा हैं असीमित


मेरे लिये तुम न  जिस्म हो ,न चंचल मन

तुम मेरे लिये अदभुत ख्याल हो ,सुंदर कल्पना हो

जिसके सहारे मै रहता हूँ जीवित


तुम्हें जब चाहे सुन लिया करता हूँ

तुम मेरे लिये प्रिय गीत हो और हो मधुर  संगीत
 किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

1 टिप्पणी:

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावो का सुन्दर समायोजन......