बुधवार, 19 दिसंबर 2012

421-शब्दों के जरिये प्रयत्न



421-शब्दों के जरिये प्रयत्न

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, June 23, 2012 at 9:14pm ·
तुम कहती हो
मेरी यह देह तो
मात्र हैं आवरण
कर्तव्यों के निर्वाह के लिये
मन पर मै करती हूँ नियंत्रण

फिर भी  छिपी हुई
तुम्हारी रूह की देह कों
मैं तलाशने का करता हूँ
शब्दों के जरिये प्रयत्न

शायद मेरी कविताओ कों पढ़कर
तुम कहती होगी
ले जाओं मुझे अपने साथ 
बिना चेहरे के ,बिना मन के
सिर्फ प्रेम के रंग से बनी मेरी परछाई का
क्या तुम कवि कर सकते हो नख शिख वर्णन ..?

तुम मुझे पहाड़ से उतरती हुई तन्हा पगडंडी सी लगती हो
तुम  साँझ के माथे पर सूरज की बिंदिया सी उभर आती हो
तुम समुद्र की लहरों की तरह बेख़ौफ़ उछलती सी लगती हो
तुम पुरईन के  पत्तों पर ओस बूंदों सी चमकती हुई लगती हो
तुम आकाश में उमड़ आये आषाढ़ के बादलों सी
आनंद के जल से भरी हुई लगती हो
किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

कोई टिप्पणी नहीं: