शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

415- कितना मुश्किल होता हैं



415- कितना मुश्किल होता हैं

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Friday, June 22, 2012 at 11:28am ·
कितना मुश्किल होता हैं
किसी के दिल में बनाना जगह
बिना स्वार्थ बिना वजह
मन के पन्ने पर
अंकित तुम्हारा नाम
आँखों में समाई तुम्हारी तस्वीर
इन सबको तुम कहती हो- एकाएक
की
मिटा देना ,भूल जाना मुझे
तुम्हारा यह पत्र पढ़कर
आंसूओं से भर गये हैं नयन

तुम कही भी रहो ,मुझे याद न भी करों
पर मुझे तो करने तो तुम्हारो आराधना
मन ही मन बस तुम्हारा मनन

व्यतीत करने दो मुझे अपना शेष जीवन
तुम्हारे संग बिताये मधुर अतीत का
करते हुए स्मरण

किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

3 टिप्‍पणियां:

राकेश कौशिक ने कहा…

संवेदनशील प्रस्तुति - बहुत सुंदर

sushma 'आहुति' ने कहा…

सुन्दर भावो को रचना में सजाया है आपने.....

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

rakesh ji ..sushama ji bahut shukriya