शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

404 -मुझ अफ़साने का



  404 -मुझ अफ़साने का
by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, May 28, 2012 at 12:28pm ·
जिसे कभी हल न कर पाऊँ
तुम ऐसा हो एक सवाल
मेरा इश्क जिसके हुश्न का दीवाना हैं
तुम ऐसी सुन्दरता हो बेमिसाल
मैं यदि शायर हूँ
तो तुम हो मेरा ख्याल
मैं फज़ा हूँ
तो तुम हो बहार
तुम यदि अक्स हो
तो मै बहता हुआ दरिया हूँ शफ्फाक
तुम यदि साकार अंजाम हो
तो मैं हूँ ख़्वाब
मैं कहकशां हूँ ..
तो तुम हो धरा शादाब
मैं खुशबुए निगार हूँ
तो तुम हो गुलज़ार
तुम्हें तो ईश्वर की जुस्तजू हैं
मुझे बस तुमसे मिलन की हैं आस
मुझ अफ़साने का
तुम ही हो उनवान

किशोर कुमार खोरेन्द्र 

उनवान=शीर्षक ,जुस्तजू =तलाश ,गुलज़ार =उद्यान ,खुशबुए निगार =प्रियतमा की खुश्बू ,
शादाब =हरी bhari .कहकशां =आकाश गंगा ,शफ्फाक =निर्मल

2 टिप्‍पणियां:

sushma 'आहुति' ने कहा…

भावों से नाजुक शब्‍द को बहुत ही सहजता से रचना में रच दिया आपने.........

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

सुषमा जी शुक्रिया