शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

393-मेरे प्रणय का तुमसे प्रिये ..!



393-मेरे प्रणय का तुमसे प्रिये ..!

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Friday, May 18, 2012 at 12:18pm ·
प्यार के बदले प्यार मिले
प्रकृति का यह नहीं हैं नियम
जीते जी परवाने का ..
शमा से कब हुआ था ..मिलन 
सहते सहते शिखा की जलन 
व्यतीत हुआ था उसका एकाकी जीवन 

शमा चुपचाप फिर भी जलती रही  
दर्द से भींगी हुई थी
क्या ..उसकी लौ की प्रत्येक किरण
पता नहीं ..
किसने किस पर ढाये थे सितम

मेरे प्रति यदि होगी  सिर्फ सहानुभूती
यदि तुम्हारे ह्रदय के भीतर
तो उसे ..मुझे प्रगट मत करना
वरना पतिंगा के परो सा ...
मेरा विदीर्ण ह्रदय जाएगा
चूर चूर हो बिखर

प्रति उत्तर में कोरे कागज सा
चुप ही रहना
तुम्हारे मौन कों
तुम्हारी सहमति समझूंगा मैं आजीवन

अंत में एक दिवस
मेरे अस्तित्व का ...
तुम्हारी मधुर स्मृति सहित
चिता की लपटों संग ...
हो जाएगा विलय
मेरे प्रणय का तुमसे प्रिये ..!
अनुरोध  हैं यह सविनय
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

3 टिप्‍पणियां:

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

Prakriti Rai

kya baat hai shabd nahi hamare paas bahut hi sundar bahv purn panktiya ..dil ko chhuti huyi ..ma saraswati ki vishesh kripa hai aappar kishor ji ..isme lesh matr bhi sandeh nahi! sadhuwaad !

प्रकृति राय

sushma 'आहुति' ने कहा…

बेजोड़ भावाभियक्ति....

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

सुषमा जी शुक्रिया