शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

365-जब लहरों सी



365-जब लहरों सी

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Tuesday, April 10, 2012 at 10:09am ·



जिस रोज कहोगी तुम मुझे अपना
उस दिन हो जाएगा पूरा मेरा सपना
कभी पर्वत सा मैंने तुम्हें बाँहों में चाहा भरना
पर तुम्हें तो सतत आता हैं नदी सा बहना

माथे पर हैं तुम्हारे उगते सूरज सी बिंदियां
काले मेघों के काजल से रंगे हैं तुम्हारे नयन
कपोल कों रंग जाती हैं सुनहरी किरण
अधरों कों तुम्हारे गुलाबी कर जाते हैं सुमन

परिधान तुम्हारा
झील में उतर आया हुआ झीना गगन
तुम्हारे जुड़े में मुझे जड़ा हुआ सा लगता हैं
चाँद ...!ऐसा कहता हैं मुझसे ..मेरा मन

जब लहरों सी
बलखाती हुई तुम चलती हो
आलिंगनबद्ध करने कों तुम्हें
आतुर हो उठता हैं ..मेरा यौवन

वैसे भी प्रकृति की हरियाली के बिना
शुष्क रेगिस्तान सा हो जाता हैं जीवन

किशोर



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