शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

363-मै हूँ यदि नदी



363-मै हूँ यदि नदी

 

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Monday, April 9, 2012 at 10:31am ·
मै हूँ यदि बूंद
तो तुम हो गागर
मै हूँ यदि नदी
तो तुम हो सागर

मै हूँ यदि कटु यथार्थ
तो तुम मुझसे मिलती हो
मधु कल्पना सी आकर

मै लघु
तो तुम हो व्यापक
मै कोहरे सा हो जाता हूँ
तुम्हें तलाशता हुआ जब ओझल
तब तुम आती हो
बदली सी घाटी में छाकर

मै एकाग्रचित्त सूना जंगल
सुनने कों आतुर सा तुम्हारे पैरों की आहट
विरह तुम्हारा मुझे कर गया हैं आह़त

भीड़ से भरे इस जग में
तलाश रहा तुम्हें मै
तुम कहती हो शायद
पाना हो मुझे यदि तो
अपने भीतर तो झाँकों जाकर
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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