शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

350-जब हुआ सुबह का आगमन



350-जब हुआ सुबह का आगमन

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Wednesday, March 28, 2012 at 1:18pm ·

 
प्रफुल्लित हुए जड़ और चेतन
जब हुआ सुबह का आगमन
गूंजने लगे
चिड़ियों के कलरव ,भ्रमरों के गुंजन
खिले पीले लाल ..
उपवन में सुमन
 झरे शुष्क पत्तों का ..
ओस बूंदों से भींगा तन
 दूब की नोकों पर अटके से लगे
मोतियों से चमकते ..जल कण
 हरे वृक्षों की ऊँचाई कों
निहारने लगा आश्चर्यचकित हो ..नील गगन
 धूप के स्वर्णिम जाल ने जब किया
बिछने के लिये इस धरा का ..चयन
 पाट तपस्वी से लगे
तोड़ न पायी नदी उनका ..संयम
 नव सृजन हेतु बांटने आया ..पवन
लिये अपने करों में परागकण
 सर्वत्र भर गया उमंग
जब हुआ सुबह का आगमन
किशोर  कुमार खोरेन्द्र 




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