शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

335-एकांत के सरोवर में




335-एकांत के सरोवर में

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Sunday, March 4, 2012 at 9:07am ·


एकांत के सरोवर में
भरी हुई
निस्तब्ध चांदनी हो तुम
 बस मै ही सुन पाऊ
वह मधुर रागिनी हो तुम

 मेरी प्रतिछाया हो
मेरी सह अनुगामिनी हो तुम
मै घटा घनघोर
पथ प्रदर्शिका सी दामिनी हो तुम

मुझ टूटे हुए तारे कों
अपने अंक में समा लेती हो
ऐसी शयामल यामिनी हो तुम

 मुझमे जगाती हो
बिना स्पर्श के ही उमंग
ऐसी कामिनी हो तुम

 स्मरण आते ही मन में तुम्हारा
हर्फ़ बन जाते हैं छंद
इतनी प्रेरणादायिनी हो तुम

 किशोर कुमार खोरेन्द्र

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