शुक्रवार, 14 दिसंबर 2012

334-पर तुम सरिता



Sunday, March 4, 2012

यह हैं ....
शब्दों का ..रिश्ता
मै काव्य 
तुम हो ...कविता
रस भर जाते हैं
तुम्हारे मूक अक्षर
ह्रदय में ...मीठा
मैं ढूढता निज में
मेरे मन के सागर में
कही खोयी हुई हो
पर तुम ...सरिता
मै यदि पृथ्वी हूँ
तुम हो 
उसकी ..हरीतिमा
मै यदि अंबर हूँ
तो तुम हो 
उसका रंग नीला

kishor