शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

33-ऊँचे ऊँचे वृक्षों के कन्धों पर



33-ऊँचे ऊँचे वृक्षों के कन्धों पर

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Saturday, June 25, 2011 at 9:24am ·




 मेरे मन का जंगल महक रहा .
हैं ..जहाँ तेरी यादों का चंदन
जीवन की घाटियों के हर मोड़ पर
तुम करती हो मेरा अभिनन्दन

ऊँचे ऊँचे वृक्षों के कन्धों पर
तुम्हारी मुस्कुराहटों की किरणों का नर्तन
शिखर के ह्रदय पर हैं
तुम्हारे प्रेम के निर्झर का उदगम स्थल

विरह के अश्रु -ओस से नम हैं
बिखरी हुई पत्तिया से भरा प्रांगण
पगडंडियों की तरह
खाईयों की गहराईयों से निकल कर
क्षितिज सा ..
मैं करता हूँ प्रिये तुम्हारे विराट  प्यार का दर्शन

तुम्हारी देह की सोंधी सोंधी खुश्बू कों लिये मुझे छू रहा हैं पवन
मन के आकाश मे   उमंग के बादल उड़ रहें हैं
कितना मन भावन हैं तुम्हारे सौन्दर्य का भव्य पदार्पण
किशोर

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