शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

32-बांसूरी की मधूर तान ..




32-बांसूरी की मधूर तान ..

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Friday, June 24, 2011 at 1:46pm ·




देखो ...हुआ नव प्रभात ...
सिंदूरी आभा लिये आया आकाश
बगूलों के उड़े धवल कतार
मुंडेर पर बैठा कुछ कह रहा एक काग
चिड़ियों के कलरव से गूंज उठे
आँगन के पेड़ों के शाख
बछड़े कों चाहिए दुलार गाय के थनों में उमड़ आया हैं प्यार
 कुंए के जलों कों पनिहारिनों का हैं  इन्तजार
 चरवाहे निकल पड़े हैं
गोधूली तक सुनायेगे वे खेतों ..कों ..नहर कों ..
उगे हुए पीपल ..बरगद के वृक्षों कों
बांसूरी की मधूर तान ..
सूनी पगडंडियों पर तब चल कर आयेगी संध्या ........
यह कहने ........
जाओं दिवस ....तुमसे कभी न हो पायेगी मेरी   मुलाक़ात 
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

कोई टिप्पणी नहीं: