गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

288-प्रत्येक मनुष्य का जीवन




288-प्रत्येक मनुष्य का जीवन

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Thursday, January 12, 2012 at 9:55pm ·


रहूँ तुम्हारे ख्यालों में..
मैं पल हर
समुद्र भी लगे तुम्हें मुझसा
छू ले तुम्हें मेरी उँगलियों सा ..
उसकी लहर

और नमकीन कर जाए
तुम्हारी तरुणाई कों
उसका जल

नाव पर बैठ कर
दूर तलक
तुम जब जाओं निकल

वहाँ से निहारना
तट पर दिखलाई देगी तुम्हें
मेरी एक झलक

आकाश से भी अधिक व्यापक
सागर से भी ज्यादा गहन
जब लगे मंझधार में
तुम्हें अपना सूनापन
तब ठंडी हवा के
एक झोके सा मुझे महसूस कर लेना
मेरे स्मरण से
तुम्हारा मन
जाएगा बहल

यूँ तो बहुत एकाकी होता हैं
प्रत्येक मनुष्य का जीवन

सौभग्यशाली हैं वे जिन्हें कोई याद करता हैं
जीता हैं सिर्फ जिसके लिये ...
और वह ..आजीवन
किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

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