बुधवार, 12 दिसंबर 2012

233-वह पेड़ जो मेरा दोस्त हैं



233-वह पेड़ जो मेरा दोस्त हैं

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Wednesday, November 9, 2011 at 2:25am ·


बचपन से अब तक
बस मेरी बाते सुनता हैं
कहता कुछ नहीं
उसे पत्तियों से लदा देख कर खुश होता रहा हूँ
.पत्तियों से विहीन  उसकी ..डालिया देखकर दुखी होता रहा हूँ
यह पेड़ मेरे बारे में सब कुछ जानता हैं
पर वह मेरी आलोचना नहीं करता हैं
उसकी पीठ पर कई बार मैं अपना नाम लिख चुका हूँ
उसकी छाया से बहुत बार घिर चुका हूँ
यह पेड़ मेरे जन्म से पहेले भी था
मेरी मृत्यु के बाद भी रहेगा
उसके तनों के बीच बने खोह के हृदय में
मेरा चेहरा छिपा रहेगा
जड़ो से फुनगी तक उसकी नसों में
मेरे लिये प्यार बहता रहेगा
किशोर  कुमार खोरेन्द्र 

कोई टिप्पणी नहीं: