शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

22-जन्म से मृत्यु तक ..



22-जन्म से मृत्यु तक ..

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Tuesday, January 11, 2011 at 6:55pm ·


.मुझे देख कर भी चुप रह जाता हैं दर्पण
अपनी ही हथेली पसारे अंत तक ...
उसकी रेखाओं कों निहारते
उलझे रह गए सारे वृक्षों के पर्ण
बहती हुई धारा -प्रवाह चली गयी
किस गंतव्य कों नदी
मैं उसके जल कों
प्रतिमाओं के चरणों पर
करता रह गया अर्पण


पथ चले संग ..खामोश
हर मोड़ रहा ..गुमशुम
घेरे रहें मुझे पर आजीवन ...
समस्याओं के ऊँचें ऊँचें पर्वत
जब कोई न मिला मित्र
खुद कों ही किया
दो भागों में मेरे मन ने विभाजित
एक श्रोता ..दूसरा रहा रचनाओं का सर्जक


कहता हैं यह जग ..
मैं हूँ शाश्वत एक प्रश्न
ढूढते रहना तुम उत्तर
मेरे अस्तित्व के औचित्य के लिये
 किसी तर्क कों ..
अब तक मिला न कोई समर्थन
लगता हैं मैं ..
चिंतन शील प्रकाश पुंज हूँ केवल
बनाया जिसे चैतन्य किरणों ने हो
कर परावर्तन


जन्म से मृत्यु तक ..
मेरे जीवन के पैर करते रहेंगे क्या ..
बस काल के समानांतर ..नर्तन
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

कोई टिप्पणी नहीं: