गुरुवार, 6 दिसंबर 2012

14-मुझें तुम याद हो गए



14-मुझें तुम याद हो गए

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Thursday, November 11, 2010 at 3:27pm ·

मुझें तुम याद हो गए
कितनें दिन और कितनी ..रात हो गए
भूलने की कोशिश में मुझे तुम याद हो गए
 मैं पुरूष हूँ आधा
मन में बसी रहती इसलिए -
सदैव एक पवित्र राधा
 
राधा सी तुम ....एक मन्त्र -जाप हो गए
 रूप नहीं ,आकार नहीं देह नही ,
साकार नही
चेतना में.. प्रेम का हम एकाकार भावः हो गए
 हर आँखों में चित्र अनंत समाया
हर मन के पास मगर प्यार लौट कर
अंत में....एक -जैसा आया
 
 उस सच्चे प्यार को पाकर लगता हैं
हम -तुम ...
भव -सागर ...पार हो गए
 *किशोर कुमार खोरेन्द्र


 

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