शनिवार, 8 दिसंबर 2012

120-आकार हो या निराकार



120-आकार हो या निराकार

by Kavi Kishor Kumar Khorendra on Sunday, August 7, 2011 at 9:49am ·


पीछा करती हैं मेरी .......
तुम्हारी निगाहें
तुम्हारी साँसे
मुझे महकाए

कितना भी चाहूँ  तुमसे दूर रहना
पर आँचल तुम्हारा मुझे छू जाए

पायल के घुंघरुओं का मधुर स्वर सुनू
रंग तुम्हारे गालों का
मुझे गुलाबी कर जाए

मृगतृष्णा  के जल सा
तुम्हारी परछाई मुझे
भींगा कर निचोड़ जाए

आकार हो या निराकार
सभी दृश्य मुझे ...
तुममे नजर आये

तुम्हारी याद में जीना
मेरा सौभाग्य हैं
प्रेम का अर्थ मुझे
अब ..यही समझाए
किशोर कुमार खोरेन्द्र 

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