शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

सब दिन नहीं होते एकसमान

27-11-12

सब दिन नहीं होते एकसमान


सब दिन नहीं होते एकसमान
परिवर्तन का नाम
ही है जीवन
हर पल नवीन ,नूतन
यही हैं प्रकृति का नियम
जिसे हैं समय की पहचान
वही मनुष्य हैं महान
सब दिन नहीं होते एकसमान

सुख के बाद दुःख ,दुःख के बाद सुख

इसी क्रम में हैं जीवन
पर ज़रूरी नहीं हैं की
वियोग के पश्चात आये मिलन
जिसे हैं इस सत्य का भान
वाही मनुष्य हैं महान
सब दिन नहीं होते एक सामान

जन्म म्रत्यु

पतन उत्थान
उदय अस्त
आगमन और प्रस्थान
कभी मिलता सम्मान
तो कभी सहना पड़ता हैं अपमान
सब दिन नहीं होते एक सामान

किशोर कुमार खोरेन्द्र

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