शुक्रवार, 30 नवंबर 2012

पल भर में .........

पल भर में .........


kishorkumarkhorendra द्वारा 24 फ़रवरी, 2010 5:07:00 PM IST पर पोस्टेड #

पल भरमे ........

हां बहुत कुछ हुआ
इस बीच
मुझे पटरिया
समझ कर

वक्त ,कई रेलों की तरह
मुझ पर से गुजर गया
फिर भी मै ज़िंदा हूँ

ताज्जुब है ....
कविता लिखने के लिये
फिर जीना
फिर मरना क्या जरूरी है ..?
अपनी सवेंदानाओ कों जानने के लिये
कभी बूंद भर अमृत
कभी प्याला भर जहर पीना क्या जरूरी है ..?

मुझ लिखे शब्दों कों
कलम की नीब
धार की तरह काटती गयी ....
मेरी पीड़ा
कों फिर वह नीब कहाँ .
शब्द दे पायी
बहुत कुछ सा -मै हर बार ...
अनलिखा भी रह जाता हूँ
भावो का एक ज्वार था ......
जिसके उतरने पर ........
मै अकेला ही था सुनसान किनारे पर
मेरे हाथ मे
मेरे आँसुओं से गीली रेत थी
और हर बार की तरह
मै शेष रह गया था

क्योकी
कविता बच ही जाती है
और ..और .लिखने के लिये
फिर -भी
चाँद मेरी व्यथा कों
समझ नही पाया था
मैंने उसकी किरणों से प्राथना की -
अब तो ..समझ जाए ........वह

किशोर

2 टिप्‍पणियां:

"Nira" ने कहा…

kishor ji aapki kavitayein toh sundar hoti hain aapne blog bhi khubsoorat banaya hai.. mubarak ho.

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

thank nira rajpal ji bahut aabhaar ki aapne mere blog ko pasand kiya meri kavitaaon ki taariif ki ..haardik shukriya ..aapka svagat hai mere blog par hameshaa .kishor