मंगलवार, 14 अगस्त 2012

क्या मैं हूँ....

निभा रहा हूँ उसे
तुमने रखी थी जो शर्त

परन्तु आज तक
समझ नहीं पाया हूँ
मै उसका अर्थ

मुझसे मिले बिना मुझे चाहना
तुमने जाते जाते यही कहा था
तब मैंने हां कह दिया था
आजीवन क्या इस बात पर
मैं अडिग रह पाउँगा
सोचा करता हूँ आजकल
क्या मैं हूँ इतना समर्थ ..?

किशोर

4 टिप्‍पणियां:

prritiy----sneh ने कहा…

pyari rachna, padhna man bhaya
shubhkamnayen

Sanju ने कहा…

nice presentation....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

expression ने कहा…

सुन्दर......

आभार
अनु

kishor kumar khorendra ने कहा…

thank u priti ji