मंगलवार, 14 अगस्त 2012

मित्रवत रिश्ता


तुमने दिया हैं मुझे
जो सिमित अधिकार
उस सीमा तक ही मै कर सकता हूँ
तुमसे व्यवहार

मेरे इस जीवन में तुम मेरे लिये
ईश्वर द्वारा मिला
एक हो उपहार

तुम खुद कों पढ़ सकती हो
मेरी कविताओं के द्वारा
उन्हें लिखने के उपरान्त

तुम ही कहती हो की
मै अपने मन की भावनाओं कों
शब्दों के जरिये अभिव्यक्त
कर पाने में हूँ निष्णात

दर्द तुम्हारा मुझे अपना सा लगे
ऐसे भी आते हैं
बातचीत के दौरान लमहात

मै कह  सकता हूँ साफ़ साफ की
मुझे पसंद हैं
तुम्हारे आकर्षक व्यैक्तित्व में ..
तुम्हारी रूह और उसका
जिस्म रूपी खूबसुरत परिधान

पर हम दोनों एक दूसरे के प्रति
कयों हैं बंधे बंधे से
मिल पाना कठिन हैं इसका
मेरी दृष्टी में उचित समाधान

इस पृथ्वी पर लोग बहुत मिलते हैं
पर कुछ ही ऐसे व्यक्ति होते हैं
लगता हैं जैसे कर रहें थे हम
उनका बरसों से इंतज़ार

और जिनसे उम्मीद रखते हैं की
यह ..मित्रवत रिश्ता बना रहें
आजीवन बरकरार

किशोर

4 टिप्‍पणियां:

Sanju ने कहा…

Very nice post.....
Aabhar!
Mere blog pr padhare.

***HAPPY INDEPENDENCE DAY***

kishor kumar khorendra ने कहा…

THANK U SANJU ..JAROOR

kishor kumar khorendra ने कहा…

15 AUG KI SHUBH KAMNA

prritiy----sneh ने कहा…

bahut hi sunder kriti hai..
shubhkamnayen