मंगलवार, 26 जून 2012

साहिल सा मैं चाहता हूँ

तुमने कर तो लिया हैं

मेरे मोहब्बत  कों कबूल


मुझसे फिर मिलने के बाद


हर बार कयों जाती हो तुम बिछुड़



तड़फ कर लहरों सी


लो तुम मुझे ढूंढ़


साहिल सा मैं चाहता हूँ


तुममे मै पूरा जाऊं ड़ूब


किशोर

3 टिप्‍पणियां:

prritiy----sneh ने कहा…

achha likha hai
shubhkamnayen

India Darpan ने कहा…

बहुत ही शानदार और सराहनीय प्रस्तुति....
बधाई

इंडिया दर्पण
पर भी पधारेँ।

कवि किशोर कुमार खोरेन्द्र ने कहा…

शुक्रिया प्रीति जी ,और इन्डियन दर्पण