रविवार, 4 अप्रैल 2010

फिर लौट आया प्यार का मौसम


फिर लौट आया प्यार का मौसम

अनुराग से भरी होगी शिकायत

दूर क्यों मुझसे रहते हो

जब नजदीक हैं हम

फिर लौट आया प्यार का मौसम


रजनीगन्धा सी महकेगी रात

जब मुझे आयेगी उसकी याद

चांदनी कों बुलाकर वह पूछेगी

सचमुच करते हैं क्या वे मेरा इंतज़ार

जान कर सच

तब बड़ जायेगी उसके ह्रदय की धड़कन

फिर लौट आया प्यार का मौसम


एक धुन गूंजती रहेगी

मन की अकुलाहट बाँसुरी सी बजती रहेगी

बार बार दुहराएंगे .........

सात जन्मो तक न अब बिछड़गें हम

फिर लौट आया प्यार का मौसम


किशोर

कोई टिप्पणी नहीं: