रविवार, 4 अप्रैल 2010

आज दिल मेरा


आज दिल मेरा

देवता की आरती का बन गया दिया

कभी लगता हैं -वे ही मन्दिर हैं

और मैं हूँ उन तक पहुँचने के लिये -बनी सीडियां

पर उनकी ,.......

मुझसे नाराजगी का सबब बरसो बाद समझ आया

जब रुखसत के वक्त उन्होंने मुझे बताया

तेरी याद में इस तरह रहा खोया कि -

तुम्हें यह बात बताने का मुझे अवसर मिल न पाया

चाहा था कि

एक बार तेरी निगाहों के समंदर में ड़ूब जांऊ

पर मुझ मंझधार से किनारा इतना दूर था कि

तुझ तक कभी पहुँच न पाया


kishor

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