गुरुवार, 11 मार्च 2010

क्या यही प्यार हैं ...




जब उसने मेरी ओर ध्यान नही दिया


तो


मैंने भी उसे किसी का होने नही दिया


क्या यही प्यार हैं ...


उसे मेरी कविताओ से प्रेम था


और


मैं उस पर रोज एक कविता लिखता था


लेकिन


यह बात वह नही जानती थी


बहुत सालो बाद


जब मैं उससे मिला


तब तक वह मेरी कविताओ कों पढ़ते पढ़ते


मेरी कविताओ का शब्द बन गयी थी


मुझे मालूम था


वो मेरी आत्मा के अमृत से भर गयी थी


तब मैंने उससे कहा


मुझे आपसे मोहब्बत हैं


मैं आपका नाम लेते हीं -एक कविता लिख लेता हूँ


संसार के सारे फूलो की सुगंध में डूब जाता हूँ


मैं खुद चांदनी सा प्रकाश बन जाता हूँ


पर


उसके भी कुछ सिद्दांत थे


उसे बस ...मेरी कविताओ से मोहब्बत थी


kishor

4 टिप्‍पणियां:

Anamika ek ehsas ने कहा…

bhut hi khoobsoorat rachna hai apko..really

Asha Pandey Ojha ने कहा…

"क्या यही प्यार हैं ..."

pyar ke ahsas se bune huae lafzon ka tut kar bikhar jana ...aseem dard

kishor kumar khorendra ने कहा…

anamika ji

shukriya

kishor kumar khorendra ने कहा…

asha ji bahut shukriya