बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

हमेशा के लिये

मुझे मेरी डायरी ने
याद किया होगा
उस कोरे पन्ने ने

जिस पर मै
shaayad

एक कविता लिखा होता
अपनी बारी के इन्तजार मे
मुझे कोस रहा होगा

लिखते लिखते थक चुकी पेन की नीब

अब
आराम करते करते थक चुकी होगी

मेरी कुर्सी में
मेरी जगह पर किसी को न पाकर
मेरा कमरा ऊब चुका होगा

इन सबको पता नहीं की मै
अब
उन्हें त्याग चुका हू
खिडकी के परदे को हटाकर

देखती हवा सोचती है -कही ..मै लौट तो नही आया
मेरी चप्पलो को

मेरे चश्मे को
मेरी कमीज को
अब तक -विशवास ही नही हुवा है
कि
मै इस दुनिया में नही हू
किसी को याद कर लिखी कविताएं

अब मेरे बदले उसे
याद करती है
और
कहती है -
हमसे बिछड़े कवि के लिए
हमारी यही सच्ची श्रद्धांजली होगी
हमेशा के लिए
किशोर

2 टिप्‍पणियां:

Asha Pandey Ojha ने कहा…

"हमेशा के लिये"
is kavita ne meree aankhen nam kar dee ..

kishor kumar khorendra ने कहा…

oh ..

sorry ..par shukriya asha ji