मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010

जब तुम चुप हो जाती हो ...


जब तुम -
चुप हो जाती हो


कोरे पन्ने

कलम

और


शब्द सारे ...


मुझसे रूठ जाते है



दृश्य सभी गुम हो जाते है


वक्त की लहरों से रिश्ते ..
टूट जाते है


और


तन्हाई की -
नदी के मौन की सतह पर
बहते रेत की आंच मे
पिघल कर अरमान सब ...घुल जाते है


एकाएक -


पेडो के हरे पत्ते सूख जाते है


फूल झर जाते है -


चुभने के लिये -शूल रह जाते है


मानो कोई -


स्वीच आफ कर गया हो .....


मेरे जीवन के आकाश मे -
जगमगाते सितारे -
सारे बुझ जाते है



जब तुम मेरी कल्पना ....!
चुप हो जाती हो ...


कोरे पन्ने

कलम

और शब्द सारे ....


मुझसे रूठ जाते है


किशोर

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