शनिवार, 23 जनवरी 2010

जब मैंने तुमसे पूछा


जब मैंने तुमसे पूछा -
क्या तुम भी मुझे चाहती हो
उसने कहा -हां
तब ऊसी क्षण

जमीन से ऊपर उठ गए मेरे पग
मुझे लगा -मेरी देह मे ..ऊग आये है पर
बादलो कों छोड़कर मुझपर

बरसने लगे इन्धनुष के सातों रंग
धूप से नहाने लगा -नदी का जल

किरणों कों बांधने लगी अपने छोर मे हर लहर
वृक्षों की फैली -॥शाखाओं के घोसलों के ...

तिनको की गठानों मे ..और मजबूत हुवे ...गठ -बंधन
पाकर मेरा संग

जिन्दगी मे मुस्कुराने लगे चटकीले सुमन
तुम्हारे कपोल की शर्मायी लालिमा ने ...दौड़कर

छू लिया मेरे हिरदय की तीव्र धड़कन
मुझे लगा मेरीचाह की मांग मे ।

भर दिए हो ॥
प्यार का सिंदूर
तुम्हारे अनुराग की उंगलियों ने ..! ... तुरंत

किशोर

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