मंगलवार, 26 जनवरी 2010

खुशी का मतलब है


खुशी का मतलब है


कोई मुझे चाहे


मेरा नाम जाने बिना


मुझे पुकारे


मुझे पहचानने का अर्थ है


की


वह जान जाए


की मेरी कविताओ मे


उसी का जिक्र है


मैंने अपने आपसे पूछा -


फ़ीर भी मै क्यों चाहता हू -


कि-


उसके सपनो मे बादलो की तरह udu


ret की तरह bichhu


नदी की तरह बहू


उसके सपने मे दिखाई देते


एक् अंतहीन सुरंग के डरावने अँधेरे मे


उसकी जगह मै ......लापता हो जाऊ


पहाड़ो से उतर कर आते


लावो की गर्म आंच मे


उसकी जगह ...मै पिघल जाऊ


और


वह घबरा कर नींद से जाग जाए


और


उसे महसूस हो कि -


उसने मुझे नही खोया है


जीवन की तरह वो भी एक् सपना था


किशोर


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