बुधवार, 20 जनवरी 2010

बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर माँ सरस्वती कों प्रणाम


भारत वर्ष मे छ: ऋतू होते है

हर मौसम का अपना अलग अलग प्रभाव दिखायी पड़ता है

हर ऋतू की अपनी अलग अलग कहानिया है

वर्षा ,शरद ,ग्रीष्म ,शिशिर ,बसंत और हेमंत ऋतू

जनवरी के अंत से बसंत ऋतू की शुरुवात होती है ..माघ माह के

शुक्ल पक्ष के पाचवे दिन से बसंत कों मनाया जाता है


ज्ञान श्रेष्ठ होता है

माँ सरस्वती विद्या की देवी है

इस मौसम के जरिये माता बच्चो और बड़ो के मन मे

उल्लाहास भरती है


ऋतू राज बसंत भी उन्के चरण छूने ही इस धरती पर

हरी हरी पत्तियों और रंग -बिरंगे फूलो के साथ

अवतरित होते है


किसानो का मन खेतो की हरियाली देखकर प्रसन्न हो उठते है

बसंत पंचमी के दिन बसंत के आगमन का स्वागत ढोल नगाडो कों बजाकर

किया जाता है

लोग पीला वस्त्र धारण करते है

माँ सरस्वती की पूजा करते है

काव्य पाठ भी किया जाता है

होली का शुभ-आरम्भ भी इसी दिन से हो जाता है


होलिका दहन के लीये रोज लकडियो के संग्रहण की

शुरुवात बच्चे अपने अतिरिक्त समय मे करने लगते है

फाग गाने का अभ्यास गायक शुरू कर देते है ...

पलाश के फूलो से बच्चे घरो मे रंग भी बनाना सीख जाते है


खेतो मे सरसों का पीला फूल अपनी छटा बिखेर देता है

हवा ठंडी और नर्म होती है ..धुप सबको पिय लगती है

धरती अपनी प्रक्रति के सौन्दर्य सहित ..मन कों मोह लेती है


सरसों के पीले फूलो के वस्त्र कों लपेटी हुवी धरती नव वधू सी लगती है

कनेर के गुलाबी और पीले फूल उग आते है

सेमल के वृक्ष पर सूखे हुवे फूलो से कपास से रेशे उड़ने लगते है

गुलमोहर के चटक लालिमा लीये सुमन मुस्कुराने लगते है


दूर दूर खेतो मे और जंगल के एकांत मे पलाश पुष्पों

के केशरिया रंगों की आभा छा जाती है

मेरे गाँव की अमराई मे आम के पेड़ ..स्वर्णिम बौरो से भर जाते है


लगता है

माँ सरस्वती वीणा बजा रही है

और कोयल अपने मधुर स्वर से उनका साथ दे रही है


भँवरे भी फूलो के कणों मे मधूर गुंजन करने लगते है


पक्षी भी बसंत का सन्देश देने लगते है


आओ हम सब भी इस मौसम की मधुरता मे कहो कर

१-मीठा बोलना सीखे

२-प्रकृति के सौन्दर्य के रहस्य कों जाने

३-शांत और उल्लाहास के इस वातावरण मे .वड्या कों ग्रहण करना सीखे

और यही संकल्प लेते हुवे

बसंत का स्वागत प्रसन्नता पूर्वक करे

माँ सरस्वती कों प्रणाम करे


हर बरस तू आये बसंत

लेकर सुन्दर प्रकृती का उपहार

माँ देवी सरस्वती के हंस

सा सबके मन मे हो उज्वलता का प्रसार


*बरखा ग्यानी

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