मंगलवार, 19 जनवरी 2010

नया मोड़


कहानी मे आया है
नया मोड़
नायिका ने कहा है
कहानी बहुत आगे बढ़ गयी है
हम दोनों कों छोड़

प्रेम -मय जीवन अंतहीन
एक् सुन्दर स्वप्न है
जिसमे ओर है न छोर
ऐसे हमारी प्रेम कहानी
सच्ची है
भला मानेगा कौन

जीवन के सूख और दुःख
जैसे किसान और मजदूर
फ़ीर रिक्शो के पहियों
और शहर के चौराहों
का अनसुना कर बोल
हम क्यों निकल आये है

इस पार के सूने मे इतनी दूर दौड़

अब मुझसे पूछ रहें -
ये बादल ये वृक्ष
यह नदी यह समुद्र
एक् बड़े प्रश्न सा -खड़े
पर्वत के संग
मेरे समक्ष होकर खामोश

लेकीन पौधे कहते है मुझसे
जब तक मुझमे
उगती रहेंगी नयी नयी पत्तिया रोज
जब तक
सरसों की हल्दी से
खेतो के अंग रहेंगे सराबोर

जब तक
आते रहेंगे हर बरस बसंत
और अमराई मे बौर

तब तक
इस प्रशन का उत्तर रहेगा
पलाश के खिले
गाढे रंग सा मौन

तब तक
प्रेम की पराकाष्टा
तक पहुचाने
उतरती रहेंगी किरणों की सीढिया
कल्पना के आकाश
और यथार्थ की धरती
के बीच बनकर भोर

ताकी यह कहानी
अंत मे
परिष्कृत हो जाए और
किशोर






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