बुधवार, 30 दिसंबर 2009

जाते जाते साल ने कहा



"इस वर्ष "
मैंने इस वर्ष कोई
गलती नही की है
जाते हुऐ साल से मैंने कहा -
मेरे हाथ से एक् भी
गिलास
गिरकर टूटा नही है
उसने ने -
आश्चर्य से मेरे टूटे हुऐ दिल कों देखा
साल ने फिर मुझे बताया
की वह -
उस जंगल से
उस पेड़ से
उस नदी से
उस व्यक्ति से ....
मिलकर आ रहा है
जिनसे मिलने
तुम गए नहीं
तुम्हारी डायरी मे लिखी
तुम्हारी कविताओ कों तुमसे शिकायत है
जाते जाते साल ने फिर मुझसे
आखरी बार कहा -
तुमने उन्हें लिखा पर जिया नही
प्यार जिससे किया
उसे बताया नहीं
किशोर कुमार खोरेन्द्र

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