मंगलवार, 24 नवंबर 2009

३-कपास सी हलकी परछाई की तरह
मन आकाश मे
बादलो की तरह तैरती हुवी
तुम
अर्थवान विचारों मे
जीवन का सच खोजती हो
वो एक लड़की
जिसे अपने जैसी
ही एक एकांत के परछाई से
मिलना है
इस एकांत मे
सुखो के दुःख है
दुखो के सुख है
मृत्यु के बाद जीवन है
जीवन के बाद मृत्यु है
कुरूपता का सौन्दर्य है
सौन्दर्य की कुरूपता है
अस्थायी से लग रहे
जीवन मे
कहाँ पर स्थिरता है
स्थिरता के भाव के समुद्र मे
क्या ...
स्थिरता की लहरे भी है
इन सब विचारों की
भीड़ मे तुम
खोयी हुवी हो
और मई तुम्हे ढूढ़ रहा हूँ
वही एक लड़की हो न ..तुम
किशोर

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