सोमवार, 16 नवंबर 2009

मुक्तक

जिंदगी हररोज तेरा नया रूप दिखाती हो,
कभी आशिक, कभी रकीब बनकर आती हो

एक टुकडा आसमान का जीने के लिए मिला
सितारे आते जाते है, अब तक चाँद नहीं मिला

गिरीश जोशी

2 टिप्‍पणियां:

Suman ने कहा…

एक टुकडा आसमान का जीने के लिए मिला
सितारे आते जाते है, अब तक चाँद नहीं मिलाnice

kishor kumar khorendra ने कहा…

shukriyaa