रविवार, 15 नवंबर 2009

कविताओ पर एक कविता

तुम कहाँ गए
हम तनहा है
वक्त मिले न मिले

आओ मेरे पास पास
ये बस मेरा मन है
नज्म तुम्हारी बनते है

जब भी मै तनहा ख़ुद को पाती हू
बीती यादें


आँखों मे नमी तेरी है

मेरी कविता तुम ही तो हो
नेह निमंत्रण बिसरा गए
आँखों मे इश्क भर क्यो नही देते हो


आखीर क्यू
मुमकीन नही है
कोई बात बने
अनाम प्रेम कहानी
न तुम भूले..न भूली जेनी
जिन्दगी एक बेशब्द किताब है

काश कोई जंजीर न होती
काश हम जंजीर बने न होते

लिखूंगी मै रोज एक ख़त
पैगाम चाँद को सुना जाना


संकलन -जेन्नी जी की कविताओ के शीर्षकों से बनायी गयी एक कविता
उन्के जन्म दिन १६-११-०९ के शुभ अवसर पर

किशोर

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