सोमवार, 23 नवंबर 2009

tum sun leti ho


मै चुप हो जाता हूँ

तुम सून हो जाती हो

मै गीत गाता हू

तुम मीठी धुन हो जाती हो


मै इस जग की सुबह में -

उग आता सूर्य सा

तुम धूप बनकर बिखर जाती हो


बहते समय को

समेट नही पाता हू अपनी बाहों में

पर हर पल तुम -

आरम्भ बन जाती हो

पाकर दुःख कभी कभी यह जीवन लगता निरर्थक

तब तुम सुख बन जाती हो

पढ़ रही जो कविता मुझे निरंतर ॥

तुम उसे सुन लेती हो


किशोर

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