सोमवार, 17 अगस्त 2009

नीले अम्बर मे तारे

नीले अम्बर मे तारे

दीप से जलते सारे

बच्चे सब पूछते

माँ से कर इशारे

माँ कहती मुन्ना प्यारे

देखो चांदनी रात के उजाले

चलो आँगन मे नाचे गाये

मिलजुलकर खुशिया मनाये

छुप छुप कर चन्दा निहारे

बादलो के पीछे से पुकारे

कहता भोर मे सूरज आए

संग हमारे रात मे

शीतल पुरवाई भाये

नीले अम्बर मे तारे

दीप से जलते सारे

{बरखा ग्यानी }

गुरुवार, 13 अगस्त 2009

इस मन नदी के

जल मे
हिलता
देख ....
आकाश
कहता
मुझसे
लहरों से लिपटा सूर्य प्रकाश
बैठो समीप
ईस सदी के
सूना करो
कभी कभी
आकर्
समय की बलखाती धारा के गीत
कभी
दुखमय संगीत
या
कलकल के शोर हँसी के
पर
महसूस करो
बाहों की तरह विस्तृत किनारों पर उगे
वृक्षो की छोटी -बड़ी पत्तियों कों पारकर आते
उल्लास सही के
लेकीन
खो
न जाना
बहुत बहुत गहराई के घने एकांत मे
बैठा है सत्य
भीतर
इस मन नदी के
{किशोर }

शनिवार, 8 अगस्त 2009

मै हूँ माँ गंगा

मै हूँ माँ गंगा
अर्पित भावनाओं के जल से
भरी हुवी
प्राथना के मृदु क्षणों मे
बह कर आए
अविरल अश्रु कणों
मे डूबी हुवी
मै माँ हूँ गंगा



सौप करदुःख अपना
लौट कर जाते है
जन -मनलेकर
भावी जीवन के लिए
नया सुखद सपना
उन्हें आशीर्वाद देती हूँ
पर
मेरे पास रह गयी
धरोहर
परछाईयों के अतीत के साथ
होता है मुझे जीना
मै हूँ माँ गंगा

लौटती लहरों के आँचल मे लपेट
दुःख सबका
मंझधार से निहारती
आपनी अपनी काया के भीतर
बेचैन
माया के अनंत हिस्सों
की बाढ़ से भरा नजारा तट का
मै हूँ माँ गंगा

{किशोर }

मै हूँ माँ गंगा

अर्पित भावनाओं
जल से
भरी हुवी
प्राथना के
मृदु क्षणों मे
बह कर
अविरल अश्रु कणों
डूबी हुवी
मैहूँ माँ गंगा

सौप कर
दुःख अपना
लौट कर जाते है
जन -मन
लेकर
भावी जीवन के लीये
नया सुखद सपना
मै उन्हें आशीर्वाद देती हूँ
पर उनकी मेरे पास रह गयी
धरोहर
परछाईयों के अतीत के
मुझे होता है जीना
मै माँ हू गंगा

मै चिता नही चन्दन की
पर चिंता करती हू हर तन की
सुगंध बन सब मन उड़ जाते
स्वजनों की आँखों की पीडा हर
लौटती लहरों से लिपटा दुःख सबका
मै हूँ माँ गंगा

{किशोर }