गुरुवार, 2 जुलाई 2009

मै उसी याद सा चिरंतन स्मरण हूँ

तुम तितलियों का सुंदर अनेक रंग हो

तुम वर्षा से भींगी हुवी एक खुश टहनी नम हो

धुप और छाँव के अनुसार निरंतर नया रूप धरती प्रकृति का आकर्षक अंग हो

तुम्हे जी लू अपनी बांहों मे भर भरपूर ,मै सोचता वो हर पल हूँ

तुम्हारी आँखों के आईने मे अमिट छवि बन रहू ,मै सोचता वो मन हूँ

अटूट रहे नेह का यह नाता ,किसी भी जनम मे बिसरे ना हम एक दूजे को
मै उसी याद सा चिरंतन स्मरण हूँ

{किशोर बुबू }

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