सोमवार, 6 जुलाई 2009

काश ...!मेरा संग तुम्हे हरदम मिल पाता

ठीक है मत बताओ अपना नाम
उसमे क्या रखा
नही पूछूंगा तुमसे
अब
तुम्हारा पता

बस रखूंगा सदेव
आँखों मे बसाकर तुम्हारी सुन्दरता

और
जीवन भर बस
पढ़ता रहूंगा तुम्हारी
रंगीन -चित्रमय कविता

इसे तो नही मानोगी न...
मेरी कोई खता

ऐसे भी जग मे
कौन किसे है पाता

पल पल बहते जल सा -
मेरे मन की बांहों मे
लेकिन
हमेशा तुम्हे भर -
दिल है रखना चाहता

कितना भी चाहू तुम्हे
सशरीर
पर तुम भी तो मुक्त हो
तुम्हारी निज की दुनिया है
और अपनी स्वतंत्रता

पर प्रेम मे
प्रिये कहा बंधन है
इसमे क्षण क्षण स्वछंद विचरता
दर्द भरा स्पन्दन है

दो ज्योतियों का मिलन
प्रगाढ़
मै निरंतर तुममे जाता घुलता
और तुम चाहती
काश मेरा संग तुम्हे
हरदम
मिल जाता

{किशोर }

गुरुवार, 2 जुलाई 2009

तुम्हारे प्यासे अधरों को तर कर गया हूँ

तुम्हारे सजीव चित्रों को देखते समय

मै तुम्हारे साथ हो जाता हूँ

तुम्हारी हँसी के लिए चमक

या

तुम्हारे उड़ते हुवे आँचल के लिए

हवा का झोंका बन जाता हूँ

किसी तस्वीर मे मुझे गुस्से से देखती हो

तो सहम जाता हूँ

और

प्यार से देखती हो तो बह जाता हूँ

मुझे पुकारती या खोजती सी दीखती हो

तो

तुम्हारे घर की छत पर वृक्ष की टहनी सा और झुक जाता हूँ

पत्तियों से तुम्हारे गाल सहला जाता हूँ

तुम्हारे गले के हार मे मोतियों सा गूँथ जाता हूँ

उड़ते हुवे केश को सवारने के लिए तुम्हारे हाथ की उंगलिया बन जाता हूँ

सदियों के रंग को निखारने के लिए धुप सा तुम्हारे चारो or घिर जाता हूँ

मै अब तुममे हर रंग सा इस तरह बिखर गया हूँ

तुम्हारे मन का पूरा हिस्सा बन गया हूँ

मै चेतना के अमृत के महासागर का

एक बूंद -

तुम्हारे प्यासे अधरों को तर कर गया हूँ

{किशोर बुबू }

मै उसी याद सा चिरंतन स्मरण हूँ

तुम तितलियों का सुंदर अनेक रंग हो

तुम वर्षा से भींगी हुवी एक खुश टहनी नम हो

धुप और छाँव के अनुसार निरंतर नया रूप धरती प्रकृति का आकर्षक अंग हो

तुम्हे जी लू अपनी बांहों मे भर भरपूर ,मै सोचता वो हर पल हूँ

तुम्हारी आँखों के आईने मे अमिट छवि बन रहू ,मै सोचता वो मन हूँ

अटूट रहे नेह का यह नाता ,किसी भी जनम मे बिसरे ना हम एक दूजे को
मै उसी याद सा चिरंतन स्मरण हूँ

{किशोर बुबू }