सोमवार, 15 जून 2009

मेरी प्रेरणा

१-मै

आधा -अधुरा अज्ञानी

तुम

शिखर तक मुझे पहुचाने का बीडा उठाने वाली

महादानी

२-तुम लगती मुझे

सरस्वती माँ की एक मुरत्त प्यारी

समीप बैठ बोलती ईमला

तब मै

लिख पाटा यह सब कविता सारी

तुम सतह

मै भरा केवल पानी

शिखर तक

मुझे पहुचने का बीडा उठानेवाली

तुम हो अमृतवाणी

तुम

शांत स्थिर पहाड़

मै

कल -कल बहता प्रवाह

तुम मंजिल

मै राह

तुम सम्पूर्ण उपन्यास

मै एक छोटी कहानी

शिखर तक

मुझे पहुचने का बिदा उठाने वाली

तुम हो

मेरी प्रेरणा

अदभुत -परम आत्मा सयानी

{किशोर }

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