शुक्रवार, 12 जून 2009

तुम्हारे करीब हूँ

जैसे
जंगल का
जग -मुझेदेखता है
स्वप्न की नींद
मेरी उड़ान को नापती है
लोगो का शहर मुझे तलाशता है
उसी तरह तुम्हारे
भीतर की
सम्पूर्णता -मुझे खोजती है
और मै
बेर के फल मे झाडी की तरह
किसी पत्थर से
घायल आम मे -वृक्ष के तरह
या
किसी प्यार मे -
दिल की तरह -धड़क रहा हूँ

मेरे कहने का अर्थ यही है
मै
धड़कन हूँ
तुम्हारे करीब हूँ
तुममे हूँ
और तुम मुझमे
_{किशोर }

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